सनातन धर्म में वर्णित 6 शास्त्र

शास्त्र एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है उपदेश, नियम या तरीका। “शास्त्र” आमतौर पर एक विशिष्ट क्षेत्र या विषय पर एक ग्रंथ या पाठ को सम्बोधित करता है।

हमारे सनातन धर्म (वर्तमान में हिन्दू धर्म ) में 6 शास्त्र वर्णित हैं।

1) न्याय शास्त्र 2) वैशेषिक शास्त्र 3) सांख्य शास्त्र 4) योग शास्त्र 5) मीमांसा शास्त्र 6) वेदांत शास्त्र (उत्तर मीमांसा)

1 न्याय शास्त्र: महर्षि गौतम द्वारा रचित इस शास्त्र में न्याय करने की पद्धति तथा उसमें हर और जीत के कारणों का स्पष्ट किया गया है।

2 वैशेषिक शास्त्र: महर्षि कणाद द्वारा रचित इस शास्त्र में धर्म को सच्चे रूप में वर्णन किया गया है। इसमें सांसारिक उन्नति तथा सिद्धि के साधन को धर्म माना गया है। इसके अनुसार, जीव के कल्याण हेतु धर्म का अनुष्ठान करना परमावश्यक होता है।

3 सांख्य शास्त्र: महर्षि कपिल द्वारा रचित इस शास्त्र में प्रकृति से सृष्टि रचना और संहार के क्रम को विशेष रूप से दर्शाया गया है। 

4 योग शास्त्र: महर्षि पतंजलि के द्वारा रचित योग शास्त्र में योग और जीव के बंधन के कारण का विवरण है। इसमें यौगिक क्रियाओ का वर्णन है की कैसे यौगिक क्रिया के द्वारा परमात्मा के समीप हुआ जा सकता है। इसमें प्राण, चित, आत्मा इत्यादि के बारे में विस्तार से वर्णन है।

5 मीमांसा शास्त्र: महर्षि जैमिनि द्वारा रचित मीमांसा शास्त्र में वैदिक यज्ञों में मंत्रों का प्रयोग तथा प्रक्रियाओं का वर्णन किया गया है।

6 वेदांत शास्त्र (उत्तर मीमांसा): महर्षि व्यास द्वारा रचित वेदांत का अर्थ है वेदों का अंतिम सिद्धांत। महर्षि व्यास द्वारा रचित ब्रह्मसूत्र इस दर्शन का मूल ग्रन्थ है। 

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